Dinosaur के बारे में जानकारी।

Hello दोस्तों, दोस्तों आज हम आपके लिए एक गजब का टॉपिक लेकर आए हैं जिसके बारे में लगभग-लगभग सभी जानते होंगे, वह है “डायनासोर”

दोस्तों डायनोसोर कई करोड़ों साल पहले रहते थे और उन्हीं का राज था इस पृथ्वी पर। वैसे यह जो बात मैंने बताइ है बहुत सामान्य बात है लेकिन मैं आपके लिए डायनासोर की कुछ ऐसी गज़ब जानकारी लाया हूं कि वह आपको कुछ ना कुछ नया जरूर सिखाएगी और आज मैं रोचक तथ्य के साथ-साथ और भी बातें आपको बताऊंगा जैसे इनकी नस्लें, रहन-सहन तथा कुछ गजब प्रश्नों के अजब जवाब तो चलिए इस रोमांच भरी पोस्ट को शुरू करते हैं।

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Dinosaur के बारे में जानकारी | रोचक तथ्य | Image Credit: Canva.

“डायनासोर” (क्लैड डायनासोर) सरीसृपों के एक समूह को दिया जाने वाला सामान्य नाम है। जो अक्सर बहुत बड़े होते है। डायनासोर पहली बार 24 करोड़ 50 लाख साल पहले (लगभग मध्य ट्राइसिक युग की शुरुआत के पास) दिखाई दिए थे और लगभग 180 मिलियन वर्ष (18 करोड साल) तक दुनिया में इनका अस्तित्व बना रहा और लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस की अवधि के अंत तक अधिकांश डायनासोर की मृत्यु हो गई थी, लेकिन अब पता चलता है कि लगभग 15 करोड़ 50 लाख वर्ष पहले एक वंश ऐसा भी था जो पक्षियों में विकसित हुआ था।

Q. डायनासोर की कितनी प्रजातियां हैं?

आज के समय में लगभग डायनासोर के साथ 100 प्रजातियों की खोज हो चुकी है।

Q. डायनासोर शब्द कहां से आया?

“डायनासोर” शब्द मूल रूप से 1842 में रिचर्ड ओवेन नामक एक ब्रिटिश जीवाश्म विज्ञानी द्वारा प्रतिपादित किया गया था। जो एक ग्रीक शब्द “डायनोस” जिसका अर्थ है भयानक और सॉरोस जिसका अर्थ है छिपकली। तो इस तरह शब्द आया डायनासोर

डायनासोर के बारे में रोचक तथ्य।

डायनासोर हमारी कल्पना से बिल्कुल अलग थे।

जब वैज्ञानिकों ने पहली बार डायनासोर के जीवाश्म की खोज की थी तो तब उन्हें लगा था कि शायद यह भूतकाल में पैदा हुई बहुत बड़ी-बड़ी छिपकलियों के अवशेष हैं।

डायनासोर सभी के सभी सात महाद्वीपों पर पाए गए हैं।

जितने भी ना उड़ने वाले डायनासोर हैं वह सब लगभग 66 मिलियन वर्ष पहले विलुप्त हो चुके हैं।

डायनासोर भले ही करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर बैठते हैं लेकिन यह पृथ्वी पर सबसे पहले राज करने वाले सरीसृप नहीं है।

यह बात तो तो निश्चित है कि डायनासोर पक्षियों के रूप में भी विकसित हुए थे।

ऐसा माना जाता है कि आज हम जिन पक्षियों को देखते हैं वह सबसे अलग तरह के डायनासोर से विकसित हुए हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एपेटोसॉरस जैसे कुछ बड़े डायनासोर लगभग 300 साल तक जीवित रहते थे।

कहीं डायनासोर की खोपड़ी में बड़े छेद थे क्योंकि वह फिर उनके दिमाग को हल्का बनाते थे और उन्हें ठंडा रखने में मदद करते थे।

सबसे लंबे नाम वाला डायनासोर माइक्रोपेचिसेफ्लोसॉरस था जिसका अर्थ है “छोटी मोटी सिर वाली छिपकली।”

कुछ डायनासोर गर्म खून वाले भी थे।

स्टैगोसोरस डायनासोर की लंबाई 30 फिट मापी गई थी लेकिन उसके दिमाग का आकार अखरोट जितना था।

अधिकांश डायनासोर का दिमाग बहुत छोटा था लेकिन वे आधुनिक सरीसृपों की तरह ही चतुर थे।

यह केवल एक मिथक है कि सभी डायनासोर भूरे हरे रंग के थे डायनासोर वास्तव में काफी रंगीन थे वैसे इनका रंग अज्ञात है क्योंकि उस समय कोई भी जीवित नहीं था।

सबसे पुराना ज्ञात डायनासोर एरोप्टोर है, जो एक मांस खाने वाला है जो 228 मिलियन वर्ष (22 करोड़ 80 लाख साल) पहले रहता था।

वैज्ञानिक अब यह सोचते हैं कि टायरानोसौरस रेक्स (tyrannosaurus rex) जैसे बड़े डायनासोर के भी पंख हो सकते थे।

कंकाल ही एक कारण है जिसकी वजह से आज हम डायनासोर के बारे में बहुत कुछ जानते हैं।

डायनासोर के पैरों के निशान पूरी दुनिया में पाए गए हैं और वैज्ञानिकों को इस बारे में बहुत सारे सुराग देते हैं कि उन्हें कौन से डायनासोर ने बनाया है।

क्या आपको पता है कुछ डायनासोर दूसरे डायनासोर को खा जाते थे।

डायनासोर पृथ्वी पर चलने वाले अब तक के सबसे बड़े जानवर थे।

डायनासोर का अध्ययन करने वाले व्यक्ति को जीवाश्म विज्ञानी (paleontologist) कहा जाता है।

जो डायनासोर अधिकांश पौधे खाते थे ऐसे डायनासोर ने अपनी सुरक्षा के लिए सींग जैसे प्राकृतिक हथियार विकसित किए थे

पौधे खाने वाले जो डायनासोर थे उनके इतने बड़े होने का एक कारण यह भी था कि वह बहुत लालची थे, खाने के मामले में। वह बड़ी मात्रा में भोजन बहुत जल्दी खा जाते थे। कभी-कभी तो बिना चबाए पूरी शाखाओं को निकल जाते थे।

सबसे बड़ा मांस खाने वाला डायनासोर जो खोजा गया है वह स्पिनोसॉरस (spinosaurus) था, जो लगभग 50 फुट लंबा था और अपना अधिकांश समय पानी में बिताया करता था।

अमेरिकी खोजकर्ता रॉय चैपमैन एंड्रयूज (Roy Chapman Andrews) ने 1923 में मंगोलिया के गोबी रेगिस्तान में पहले ज्ञात डायनासोर के अंडे खोजे थे। उनकी खोज से पहले वैज्ञानिकों को यह नहीं पता था कि डायनासोर कैसे प्रजनन करते हैं।

2015 में वैज्ञानिक ने एक नई डायनासोर प्रजाति की खोज की थी। उन्होंने इससे हेलबॉय नाम दिया था।

कुछ सबसे बड़े पौधे खाने वाले डायनासोर को 1 दिन में 1 टन जितना खाना खाना पड़ता था। यह हर दिन बस के आकार की वनस्पतियों के ढेर को खाने के समान है।

कुछ डायनासोर की पूछ 45 फीट से अधिक लंबी थी। अधिकांश डायनासोर की पूंछ लंबी होती थी जिससे उन्हें दौड़ते समय अपना संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती थी।

230 मिलियन वर्ष (23 करोड़ वर्ष) पहले ट्राइसिक काल के दौरान दिखाई देने वाले पहले डायनासोर छोटे और हल्के थे। जुरासिक और क्रेटेशियस काल के दौरान बड़े डायनासोर जैसे ब्राचियोसौरस और ट्राइसेराटॉप्स दिखाई दिया करते थे।

कुछ डायनासोर मांस खाने वाले और कुछ शाकाहारी पौधे खाने वाले थे। कोई दो पैरों पर चलता था जबकि कोई चार पैरों पर चलता था। कुछ के सींग और कांटे थे तो दूसरों की मोटी उबड़ खाबड़ त्वचा थी और कुछ के पंख भी थे।

अब तक के सबसे छोटे डायनासोर के अंडे लगभग 0.7 इंच के पाए गए थे और वह भी 2002 और 2003 में पूर्वोत्तर थाईलैंड में पाए गए थे।

वैज्ञानिकों को पता चला है कि सबसे बड़े डायनासोर के अंडे सैग्नोसोरस के अंडे हैं जो लगभग 19 इंच लंबे थे।

स्टैगोसोरस और टायरन्नोसोरस रेक्स के अस्तित्व की बीच का समय मनुष्य और डायनासोर को अलग करने वाले काल से भी बहुत लंबा है।

डायनासोर के काल में पृथ्वी पर दिन छोटे और साल लंबे हुआ करते थे।

डायनासोर के शरीर पर पिस्सू करीब 1 इंच लंबी हुआ करते थे यह बात 2012 में मंगोलिया की वैज्ञानिकों ने दो प्रकार के जीवाश्म की पहचान करने के बाद बताई थी।

☞ नाइजरसोरस नाम के डायनासोर के जबड़े में दांतो की 50 लाइनें थी।

☞ पेचीसेफालोसोरस नाम की डायनासोर की 9 इंच मोटी खोपड़ी थी।

वैज्ञानिक डायनासोर के पैरों के निशान के बीच के अंतराल को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि डायनासोर कितनी तेजी से चला या भागा था।

इन डायनासोर के बारे में मैं जब स्क्रिप्ट लिख रहा था तब डायनासोर की ऐसी याद आई कि अगले दिन डोरेमोन की डायनासोर वाली मूवी डाउनलोड की और सुबह सब के साथ खाना खाते वक्त पूरी देखी सोचा आप के साथ इस बात को शेयर करूं…😇

डायनासोर के नाम हमेशा एक जैसे नहीं होते। उदाहरण के लिए जब जीवाश्म विज्ञानी ओथनील सी मार्श ने पहली बार एक विशाल सेरूपोड की हड्डियों की खोज की तो उन्होंने इसका नाम ऐपेटोसोरस रखा लेकिन किसी कारणवश इसे फिर ब्रांटोसोरस नाम दिया गया लेकिन फिर वापस किसी और कारण की वजह से इसे एपेटोसोरस में बदला।

जब डायनासोर जीवित थे तब चंद्रमा पर सक्रिय ज्वालामुखी थे।

स्टैगोसोरस के पीछे की प्लेटों को मूल रूप से सुरक्षात्मक कवच के रूप में जाना जाता था। लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी पीछे की प्लेटों का उपयोग इनके विशाल शरीर को ठंडा रखने के लिए उपयोग किया जाता था। नए सबूत पेश किए जाने के बाद यह सिद्धांत व्यापक रूप से स्वीकार किया गया था कि प्लेटें वास्तव में नसों से भरी हुई होती थी ताकि रक्त उन के माध्यम से यात्रा कर सकें।

डायनासोर मेसोजोइक युग में रहते थे। जिसमें ट्राइसिक जुरासिक और क्रेटेशियस काल शामिल थे। मेसोजोइक युग 225 मिलियन वर्ष (22 करोड़ 50 लाख साल) पहले शुरू हुआ था और 66 मिलियन वर्ष पहले समाप्त हुआ था।

डायनासोर के भोजन के बारे में हमने आज तक जो कुछ भी जाना है वह सब उनके कोप्रोलाइट्स के जीवाश्म से आता है… (मल के जीवाश्म को कोप्रोलाइट्स कहते हैं)

यह अनुमान लगाया गया है कि सौरोपोड्स (अर्जेंटीनोसोरस की तरह लंबी गर्दन वाले डायनासोर) के पेट किण्वन कक्षों की तरह काम करते थे क्योंकि उनके रेशेदार भोजन को पचाने में मदद करने के लिए गैस बनाने वाली बैक्टीरिया की आवश्यकता होती थी। इसका मतलब यह था कि सौरोपोडस बहुत अधिक पादते थे। जुरासिक पार्क सच में एक बहुत बदबूदार जगह रही होगी।

यह विश्वास करना मुश्किल हो सकता है लेकिन आधुनिक जीवन के मुर्गे शक्तिशाली टायरन्नोसोरस रेक्स की बहुत निकटतम जीवित रिश्तेदार हैं।

ऐपेटोसोरस और अन्य सौरोपोड्स डायनासोर संभवत: ध्वनि की गति से अधिक गति से अपनी पूंछ के सिरे को हिलाने में सक्षम थे।

एपेटोसोरस से जैसे सोरोपॉड डायनासोर शब्द शायद युद्ध में अपनी गर्दन का इस्तेमाल करते थे उनकी गर्दन बहुत बड़ी हुआ करती थी

50 फीट वाला लियोप्लेरोडन सबसे बड़ा जलिया सरीसृप था जो ब्लू व्हेल के आकार का आधा था।

मनुष्य की आंखें आगे की ओर होती हैं ताकि वे 3डी में देख सके। ट्राइसेराटॉप्स की तरह के पौधे खाने वाले डायनासोर की आंखें हर तरफ देख सकती थी, ताकि वे खाना खाते समय खतरे को देख सकें।

सांप और छिपकली बड़े होने पर अपनी त्वचा छोड़ देते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि डायनासोर ने भी ऐसा ही किया होगा।

तो दोस्तों यहां तक का सफर था रोचक तथ्यों का अब बढ़ते हैं रोचक प्रश्नों के गजब उत्तर की तरफ…!

Q.1. दुनिया का पहला डायनासोर कौन और कब आया था?

ईरोप्टोर(Eoraptor) ने डायनासोर की युग की शुरुआत का प्रतिनिधित्व किया है। अर्जेंटीना की लगभग 231 मिलियन वर्षों पुरानी चट्टान में पाई जाने वाले इस विवादास्पद छोटे जीव को अक्सर सबसे पहले ज्ञात डायनासोर के रूप में देखा जाता है।

Q.2. सबसे चतुर डायनासोर कौन सा था?

ट्रोडोन(Troodon) एक आदमी के आकार का मांस खाने वाला डायनासोर था। जिसका मस्तिष्क एवोकैडो के गड्ढे जितना बड़ा था। यह डायनासोर मेसोजॉइक युग के स्तनधारियों सहित डायनासोर के समय का सबसे चतुर जानवर था।

Q.3. डायनासोर की मृत्यु कैसे हुई या वे विलुप्त कैसे हो गए?

सभी डायनासोर एक ही समय में विलुप्त नहीं हुए थे इस बात पर काफी सारी वैज्ञानिकों के बीच में उनके सिद्धांतों को लेकर काफी बहस होती रहती है परंतु उल्कापिंड का गिरना इस सिद्धांत को और एक विशाल ज्वालामुखी के फटने यह दोनों सिद्धांत बहुत प्रमुख रूप से गिने जाते हैं।

उल्का पिंड के प्रहार का सिद्धांत

जब आज से लगभग 65 मिलियन वर्ष पहले मैक्सिको की यूकाटन प्रायद्वीप में उल्का पिंड गिरा था… तो वह उल्कापिंड कोई आग का गोला नहीं था, जिसने पृथ्वी पर सभी डायनासोर को और समुद्री सरीसृप को तुरंत ही भस्म कर दिया। इसके बजाय विलुप्त होने की प्रक्रिया तो सैकड़ों और संभवतः हजारों वर्षों तक चली क्योंकि वैश्विक तापमान में गिरावट, सूर्य के प्रकाश में कमी और वनस्पति की कमी ने खाद्य श्रृंखला को नीचे से ऊपर तक बदल दिया था। कुछ अलग-अलग डायनासोर आबादी दुनिया के दूरदराज के इलाकों में अपने भाइयों की तुलना में थोड़ी देर तक जीवित रहे होंगे लेकिन यह एक निश्चित तथ्य है कि आज डायनोसोर जीवित नहीं है।

अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के रिचर्ड गिल्डर ग्रैजुएट स्कूल में पीएचडी के उम्मीदवार “डेनियल बार्टा” का कहना है कि.. “आज पक्षियों की जितनी भी प्रजातियां जीवित हैं (कम से कम 10,000) वो सब डायनासोर के वंशज ही हैं… और आज बिल्कुल जीवित और स्वस्थ हैं।”

 

Govinda verma

नमस्ते दोस्तों...🙏 दोस्तों मैं कक्षा 11वीं का छात्र हूं जब मैंने यह Website बनाई। मुझे विज्ञान की उन चीजों को जानना अच्छा लगता है जो आमतौर पर किसी को भी न बताई जाए... और उन्हीं सबको हम रोचक तथ्य कहते हैं। मेरी इस विषय में इतनी रुचि थी की मैंने अपने ज्ञान को बांटना चाहा और फिर मैंने अपनी यह Website 16/06/2021 को बनाई। इस Website पर आपको रोचक तथ्य के अलावा कुछ ऐसे प्रश्नों के उत्तर भी जानने को मिलेंगे जो शायद कभी आपके विचारों में न आए हों। और मेरी भी आपसे यही विनती है की आप हमारी Website के बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा बताएं ताकि वो भी अपने ज्ञान में वृद्धि कर सके। तो आप सब अपना बहुत सारा ध्यान रखना "जय माता दी"।

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